Published on: 10 Jun 2026
*आईजीयू में दो दिवसीय योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण एवं सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन।*
उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा तथा हरियाणा योग आयोग के निर्देशन में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण एवं सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में किया गया।
समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. मंजू पुरी, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग ने की। कार्यक्रम में डॉ. शकुंतला, सहायक आचार्य, हिंदी विभाग ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
सम्मेलन के प्रथम वक्ता डॉ. राकेश चिल्लर, योग विशेषज्ञ, पंचकर्म केंद्र, रेवाड़ी रहे। उन्होंने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में योग शिक्षा की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि योग शिक्षा विद्यार्थियों के समग्र विकास, नैतिक मूल्यों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
द्वितीय वक्ता डॉ. जयपाल सिंह राजपूत, सहायक प्राध्यापक, योग विभाग, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने “गैर-संचारी रोगों (NCDs) में योग अभ्यास के साक्ष्य-आधारित लाभ” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिक शोधों एवं अध्ययनों के आधार पर बताया कि नियमित योगाभ्यास मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा तथा मानसिक तनाव जैसी जीवनशैली जनित बीमारियों की रोकथाम एवं प्रबंधन में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है।
तृतीय वक्ता डॉ. धर्मबीर यादव रहे, जिन्होंने “योगासन खेल : अवसर और चुनौतियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने योगासन खेलों के बढ़ते वैश्विक महत्व, युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों तथा इसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। अपने उद्बोधन में उन्होंने हाल ही में गुजरात अहमदाबाद में संपन्न हुई प्रथम विश्व योगासन प्रतियोगिता पर भी प्रतिभागियों का ध्यानाकर्षण करवाया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने योग शिक्षा, गैर-संचारी रोगों में योग की भूमिका, योगासन खेलों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में योग के समावेश से संबंधित अनेक जिज्ञासाएँ एवं प्रश्न प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने सभी प्रश्नों का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक समाधान किया। अपने प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर प्राप्त कर प्रतिभागियों ने प्रसन्नता व्यक्त की तथा कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मंजू पुरी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित एवं शांतिपूर्ण बनाने वाली एक प्रभावशाली जीवनशैली है। उन्होंने योग को ऐसी औषधि बताया, जिसके माध्यम से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शकुंतला ने अपने संबोधन में कहा कि योग के माध्यम से हम न केवल अपने जीवन को स्वस्थ एवं सकारात्मक बना सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी स्वस्थ एवं संस्कारित जीवन का मार्ग प्रदान कर सकते हैं।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्री प्रवीण, सहायक आचार्य द्वारा किया गया।
अंत में कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. जयपाल सिंह राजपूत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, हरियाणा योग आयोग, उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा, आमंत्रित वक्ताओं तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण एवं विचार गोष्ठी के रूप में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं ज्ञानवर्धक रहा, जिसने विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को योग के वैज्ञानिक, शैक्षिक तथा व्यावहारिक पक्षों से अवगत कराया।